
नीट (NEET) पेपर लीक और अन्य परीक्षा धांधलियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज या अत्यधिक बल प्रयोग को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले से जुड़ी याचिकाओं पर अब मंगलवार को विस्तृत सुनवाई करेगी।
कोर्ट की मुख्य बातें और टिप्पणियां:
- सुरक्षा दोनों पक्षों की जरूरी: सुनवाई के दौरान प्रदर्शन में पुलिसकर्मियों के घायल होने की याचिका का जिक्र आने पर कोर्ट ने कहा कि इंसानियत और सुरक्षा हर किसी के लिए समान है—चाहे वह आम प्रदर्शनकारी हो या ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी।
- पूरे देश में बने एक समान प्रोटोकॉल: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए पूरे देश में एक पारदर्शी और तय व्यवस्था (Protocol) होनी चाहिए। प्रदर्शनों के लिए उचित स्थान तय हों और बेवजह पाबंदियां न लगाई जाएं।
- उपद्रवियों और छात्रों में फर्क समझे पुलिस: पीठ ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन में असामाजिक तत्व घुस आते हैं, तो उनसे निपटने का तरीका अलग होना चाहिए। इसकी आड़ में सभी छात्रों या शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करना सही नहीं है।
- लोकतंत्र में अनुशासन भी जरूरी: मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रदर्शनकारियों में स्वअनुशासन (Self-discipline) का होना भी उतना ही आवश्यक है।
क्या है पूरा मामला?
नीट परीक्षा में हुई धांधली के विरोध में देशभर के छात्र लगातार सड़कों पर हैं। हाल ही में दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में संसद की ओर मार्च निकाल रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े थे। छात्र तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। पुलिस की इसी कथित बर्बरता और ज्यादती के खिलाफ छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।



